उर्दू से टूटेगा एएमयू में पढ़ने का सपना

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जागरण

जागरण संवाददाता, अलीगढ़ : एएमयू की नौवीं की प्रवेश परीक्षा में उर्दू के सवालों से अभ्यर्थियों को जूझना पड़ा। यही उर्दू एएमयू में पढ़ने के सपने को भी तोड़ेगी। रविवार को 22 केंद्रों पर हुई परीक्षा में 11624 अभ्यर्थी शामिल हुए। इनमें 977 गैरहाजिर रहे।

नौवीं में दाखिले के लिए 12601 छात्र-छात्राओं ने आवेदन किया था। आज सुबह 10 से 12 बजे परीक्षा हुई। इसमें कई राज्यों के अभ्यर्थी शामिल हुए। परीक्षा केंद्रों में सबसे अधिक परीक्षार्थी एएमयू ग‌र्ल्स हाईस्कूल, वीमेंस कॉलेज, सीनियर सेकेंडरी में बैठे। परीक्षा के बाद कुछ छात्रों के चेहरे खिले हुए थेस कुछ के मुरझाए हुए थे। चिंता ऐसे परीक्षार्थियों के चेहरे पर थी, जो उर्दू भाषा में पारंगत नहीं थे। कुछ तो ऐसे भी मिले जो उर्दू पढ़ना भी नहीं जानते थे। ऐसे छात्रों की प्रवेश में उर्दू रोड़ा बन सकती है, क्योंकि उर्दू में पास हुए बिना एएमयू में प्रवेश संभव नहीं है। परीक्षा में 10 सवाल उर्दू में पूछे गए थे।
यहां हर सपना होता है पूरा
एएमयू में लोग अपने बच्चों को क्यों पढ़ाना चाहते हैं। इसका जवाब सिद्धार्थनगर के अख्तर आलम ने बड़े सलीके से दिया। 9वीं की परीक्षा देने आए अख्तर का कहना था कि यहां पढ़ाई तो सस्ती है ही, पढ़ने का माहौल भी अच्छा है। हास्टल में रहकर छात्र अपने पढ़ने, खेलने का समय तय कर सकता है।
………….
परीक्षार्थियों के बोल
विज्ञान, गणित के सवाल अच्छे हुए हैं। उर्दू को लेकर परेशान हूं। एक माह पहले ही उर्दू सीखना शुरू किया था।
– शनि सिंह।
उर्दू के सवालों में कोई परेशानी नहीं हुई। सभी सवाल ठीक हुए हैं। विज्ञान को लेकर जरूर परेशानी हुई।
-वरीरा।
गणित व विज्ञान के सवाल भी ठीक हुए हैं। तैयारी के अनुसार सवाल आए। उर्दू में जरूर परेशानी हुई है।
– संध्या चौधरी।
अधिकांश सवाल कोर्स में से आए थे, पेपर ठीक हुआ है। उम्मीद है सफलता उन्हें जरूर मिलेगी।
– उत्कर्ष उपाध्याय।
…..
परीक्षा शांतिपूर्ण संपन्न हुई है। 977 परीक्षार्थी अनुपस्थित थे। कोशिश की जा रही है कि 10 दिन बाद परिणाम घोषित कर दिया जाए।
– प्रो. जावेद अख्तर, कंट्रोलर एएमयू।

Citation
Jagaran, “उर्दू से टूटेगा एएमयू में पढ़ने का सपना,” in Jagaran, March 23, 2015. Accessed on April 8, 2015, at: http://www.jagran.com/uttar-pradesh/aligarh-city-12191762.html

Disclaimer
The item above written by Jagaran and published in Jagaran on March 23, 2015, is catalogued here in full by Faiz-e-Zabaan for non-profit educational purpose only. Faiz-e-Zabaan neither claims the ownership nor the authorship of this item. The link to the original source accessed on April 8, 2015, is available here. Faiz-e-Zabaan is not responsible for the content of the external websites.

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